कांग्रेस को हुआ क्या है?
डॉ. वेदप्रताप वैदिक
मेरी समझ में नहीं आया कि कांग्रेस पार्टी को हुआ क्या है? दुनिया की सबसे बड़ी और देश की सबसे पुरानी पार्टी ने बुद्धि से काम लेना क्यों बंद कर दिया है? यदि सोनिया गांधी और उनके स्वनामधन्य सुपुत्र ने ‘नेशनल हेरल्ड’ की लगभग 2000 करोड़ रु. की संपत्ति अपने नाम करवा ली है तो उस सारे मामले से अदालतों को निपटने दें। वह बड़ा लेन-देन तो मां-बेटे ने वकीलों से पूछताछ करके ही किया होगा। चिदंबरम और कपिल सिब्बल जैसे नामी वकील मां-बेटे की सेवा-टहल में पहले से ही हैं। यह ठीक है कि मां और बेटा, दोनों ही खास पढ़े-लिखे नहीं हैं लेकिन उनमें इतनी बुद्धि तो है कि इतना बड़ा लेन-देन करते समय वे कानून की गिरफ्त में न आ जाएं। पता नहीं, अदालत से वे इतना क्यों डर गए हैं? अदालत ने उनके खिलाफ अभी तक कोई फैसला नहीं दिया है। सिर्फ यही कहा है कि आरोपियों का आचरण अपराधियों-जैसा मालूम पड़ता है, जिन्होंने एक ट्रस्ट की संपत्ति अपने नाम करवा ली। आरोपी अदालत में पेश हो, यह कहकर जजों ने क्या गुनाह कर दिया है? इंदिरा गांधी और नरसिंहरावजी जैसे कद्दावर लोग भी अदालत में पेश होते रहे हैं। सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक बात तो यह हुई कि अदालत में पेशी के सवाल पर संसद के दोनों सदन ठप्प कर दिए गए! भला, संसद ने मां-बेटे का क्या बिगाड़ा है? वहां तो उन्हें रोज़ बैठना चाहिए था। इस बात की उन्हें तनखा मिलती है लेकिन न तो वे खुद वहां नियमित जाते हैं और न अब वे दूसरों को जाने देते हैं।
अदालत का गुस्सा संसद पर उतारने से कांग्रेस को क्या फायदा होगा? बल्कि नुकसान होगा। सारे देश में फिजूल बदनामी होगी। बोफोर्स के दाग अभी तक धुले नहीं हैं। अब देश के बच्चे-बच्चे को ‘नेशनल हेरल्ड’ के ‘घपले’ का पता चल जाएगा। यदि कांग्रेस यह धींगामस्ती नहीं करती और मां-बेटा गरिमामय ढंग से अपना मुकदमा लड़ते तो शायद वे जीत जाते। यह बात और भी बेतुकी है कि सुब्रमण्यम स्वामी मोदी सरकार के इशारे पर मां-बेटे को फंसा रहे हैं। डाॅ. स्वामी अपनी मर्जी के मालिक खुद हैं। अगर उनका बस चले तो वे मोदी को भी किसी न किसी मुकदमे में फंसा दें। इस मुकदमे के आधार पर यह कहना कि यह भारत को कांग्रेस-मुक्त बनाने के लिए किया जा रहा है, बिल्कुल गलत हैं। सोनिया, राहुल और उनके 6-7 साथियों को जेल हो गई तो क्या कांग्रेस-जैसी महान पार्टी खत्म हो जाएगी? यदि हां, तो ऐसी निकम्मी पार्टी को जल्दी से जल्दी खत्म क्यों नहीं हो जाना चाहिए? कांग्रेस की जैसी दुर्दशा आज है, इतिहास में पहले कभी नहीं हुई। इस पार्टी को बचाना बहुत जरुरी है। भारतीय लोकतंत्र के लिए जरुरी है। इसलिए उम्मीद की जाती है कि कांग्रेस परिपक्वता का परिचय देगी। अगर वह भी नौटंकियों में उलझ गई तो इस भारत का क्या होगा?
9 दिसंबर 2015
9 दिसंबर 2015
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Ved Pratap Vaidik
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