Monday, 30 November 2015


ऐसे हीरो की फिल्म देखो जिसका पैसा देश के काम आता हो । ऐसे लोगो की फिल्में मत देखो जो देश विरोधी हो । इसलिये कृपया आमिर खान और शहरुख खान की सभी आने वाली फिल्मो का विरोध करे और इनकी फिल्मो का बहिष्कार करे हाल सभी खाली होने चाहिये । इन दोनो ने सिर्फ हमारे प्यार को देखा है अब देश के प्रति प्रेम भी देख लें । आज एक दिल्ली आया लेकिन चुप रहा क्योकि इसकी दिसम्बर २०१५ में फिल्म आने वाली है ।

Sunday, 29 November 2015



एक रुपया कभी मत छोड़ो । पहले एक रुपया लो 
बाद में समान का हिसाब करो ।

श्री रतन टाटा जी एक नेक, निर्भीक और देशभक्त इन्सान है । 
तभी तो मंन्त्रीजी का बैन्ड बजा डाला । 
क्या आप बता सकते हो कि वो मंत्री कौन था ?

Friday, 27 November 2015

देशभक्त आगे आये



इन दोनो का देखिये पाकिस्तान प्रेम  दोनो का बुलावा आ चुका है । एक को हाफिज बुलाता है दूसरे को AQ बुलाता है ।
दोनो देश को बदनाम करके गर्व होने का ड्रामा करते है ।
क्या आप देशभक्त है ? अगर हाँ तो
क्या आप इनकी आने वाली कोई भी पिक्चर देखेगे ?
दोस्तो, कृपया कसम ले कि इन दोनो की कोई भी फिल्म नहीं देखूगा । क्योकि देश हमारी पहिचान, देश है तो हम है । इसलिये देश को बदनाम करने वालो को सबक देना बहुत जरुरी है ।
देशभक्त आगे आये और अपना कर्तव्य जरुर करें ।

जय हिन्द, जय भारत





शासक मजबूत हो तो चोर, लुटेरों, भ्रष्टाचारियों, देशद्रोहियों को सताये डर



मित्रो आपको एक बात आज बताता हूँ
जब धनानंद का राज था तब चोरों, लुटेरों की मौज थी, धनानंद पूरी तरह भ्रष्ट था
धनानंद के राज में लोग बहुत परेशान हुए और उन्ही लोगों ने
एक गरीब माँ के बेटे चन्द्रगुप्त मौर्य का साथ दिया और जब चन्द्रगुप्त का राज आ गया
तब चोरों, लुटेरों पर कारवाही होने लगी
दशको से चोरो, लुटेरों का आनंद खत्म होने लगा तो उन्होंने शासन को बदनाम करने के लिए
भारत को असहनशील बताना शुरू कर दिया
आचार्य चाणक्य ने आज से लगभग ढाई हज़ार साल पहले ही आज के हालात का वर्णन अर्थशाश्त्र में किया है
और आज वही हाल है देश में जहाँ कुछ लोग जिन्हें पाकिस्तान से प्रेम है उन्हें हमारा देश असहिषणु लग रहा है
कुछ दिन पहले विदेशी अख़बारों ने बताया था की सोनिया गांधी के पास ब्रिटेन की महारानी से भी अधिक धन है
और कुछ दिन पहले ही खुलासा हुआ है की राहुल गांधी की ब्रिटेन में भी कंपनियां है
सोनिया गांधी के दामाद पर स्वयं जेल यात्रा का खतरा है
अब आप स्वयं सोचे, जिन चोर लुटेरों की मौज ख़त्म हो गयी और अब उनपे कारवाही का खतरा हो
वो अपने लोगों से शासन को बदनाम करवाने के लिए क्या क्या नहीं करेंगे

‪#‎Dainikbharat‬ ‪#‎Ravi21‬

एक टी शर्ट का रेट 12300





मोदी को सूट बूट वाला आदमी कहने वाले राहुल गांधी की सिर्फ एक टी शर्ट का रेट देखिये
12 हजार रूपये
ऐसे बखिया उधेड़ देने वाले सबूत बार बार हाथ नही आते

ठोको शेयर पर शेयर

दानी कर्ण




अक्षय कुमार को अगर किसानो का मित्र कहे तो अतिशियोक्ती नहीं होगी । 
गरीब किसानो की सहायता के लिये ५० लाख (FIFTY LAKH) दान दिया है । 
ऐसे हीरो की फिल्म देखो जिसका पैसा देश को काम आता हो । 
ऐसे लोगो की फिल्में मत देखो जो देश विरोधी हो |

Thursday, 26 November 2015

चले थे मजाक उड़ाने, खुद मजाक बन गये ।


चले थे मोदी जी का मजाक उड़ाने

खुद मजाक बन गये ।

एक कहावत है कि “विनाश काले विपरीत बुद्दि” और राहुल गाँधी जी ने अपनी सोच छात्रो पर थोपनी चाही लेकिन छात्र जमीनी सच्चाई से वाकिफ थे और ये अपना पूरा होम वर्क करते है और पूरी तरह से जागरुक है। ये बिहार नहीं है इसे Karnataka  (Bengaluru) कहते है ।

Wednesday, 25 November 2015

आमिर खान और शहरुख खान की फिल्मो का बहिष्कार करें ।


जो करें अपने देश से प्यार

वो इन दोनो की फिल्मो का करे बहिष्कार

आमिर खान और शहरुख खान की वकवास के विरोध में, मै सुबेदार नरेन्द्र सिहं चौहान (भारतीय सेना) और मेरा परिवार, भगवान की शपथ लेता है कि इन दोनो की कोई भी फिल्म नहीं देखेगे और सभी देश प्रेमियो और देशभक्तो से मेरा अनुरोध है कि इनकी फिल्मो का बहिष्कार करें और न देखे और दूसरो को सलाह दे कि बो भी इनकी फिल्मे न देखे । अब दोस्तो समय आ गया है एक जुट होने का, कुछ कर गुजरने का और इन राष्ट्र विरोधियों को मुहँ तोड़ जबाव देना का । दोस्तों आपका क्या विचार है ? आप देश के साथ है या आमीर खान के साथ ? दोस्तो इसकी फिल्म देखना बंद करो । क्या आप लोग ऐसा करोगे ? एसा करने से हम लोग इन पर ऐक आर्थिक पतिबन्ध लगा सकेगे । कृपया आमिर खान और शहरुख खान का विरोध करे इनकी फिल्मो का बहिष्कार करे ।

राष्ट्र विरोधी ताकतें

आज देश में राष्ट्र विरोधी ताकतें जो कर रही है लेकिन ये लोग भी तो इस देश के है फिर ऐसा क्यो कर रहे है ? इनको कुछ दिखायी क्यो नही देता ? इन्हें चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिये । ये राष्ट्रविरोधी लोग देश में ऐसा माहोल पैदा किया जा रहा है जो वास्तव में है नहीं, भ्रम वाला माहोल पैदा किया जा रहा है । राष्ट्र विरोधी लोगो का मुख्य मुददा या कहे मकसद है कि वर्तमान मोदीजी की सरकार को देश की नजरो में असफल करना है ऐसा करने के लिये ये राष्ट्र विरोधी ताकते बड़ी-बड़ी हस्तियों को शामिल कर रही है जो कही न कही शुरुआती दौर से प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विरोधी थे और अब भी है । ये कुछ फिल्मकार, कुछ साहित्यकार, मिडिया और बहुत सारे राजनैतिक दल इसमें शामिल है ये जग जाहिर है राष्ट्र विरोधी ताकतो ने वर्तमान सरकार को असफल बनाने के लिये इस तरह का चक्रव्यूह रचा है जो बिहार चुनावो तक ये खूब चलता रहा और अब लोक सभा का शीतकालीन सत्र शुरु होने वाला है ये मुददा दुबारा झूठी व मनगढ़्न्त बयानबाजी से जोर पकड़ रहा है, ताकि ये लोक सभा का शीतकालीन सत्र भी हंगामे की भेट चढ़ जाये और सरकार के सारे महत्वपूर्ण बिल अटक जाये और विकास ठप्प पड़ जायें ।

Tuesday, 24 November 2015

आमिर खान और शहरुख की फिल्में नहीं देखेगे


              जो करें अपने देश से प्यार, 
              वो इन दोनो की फिल्मो का करे बहिष्कार ।


आमिर खान और शहरुख खान की अपमान जनक टिप्पणियो के विरोध में, मै सुबेदार नरेन्द्र सिहं चौहान (भारतीय सेना) और मेरा परिवार भगवान की कसम खाते है कि इन दोनो की कोई भी फिल्म नहीं देखेगे और सभी देश प्रेमियो और देशभक्तो से मेरा अनुरोध है कि इनकी फिल्मो का बहिष्कार करें और न देखे और दूसरो को भी सलाह दे कि बो भी इनकी फिल्मे न देखे । अब दोस्तो समय आ गया है एक जुट होने का, कुछ कर गुजरने का और इन राष्ट्र विरोधियों को मुहँ तोड़ जबाव देना का ।

गीता ज्ञान

कर्म योग की मुख्य बातें – अपने कर्तव्य के द्दारा दूसरे के अधिकार की रक्षा करना कर्मफल का आर्थात अपने अधिकार का त्याग करना । दूसरो के अधिकार की रक्षा करने से पुराना राग मिट जाता है और अपने अधिकार का त्याग करने से नया राग पैदा नही होता, इस प्रकार पुराना राग मिटने से और नया राग पैदा न होने से कर्मयोग वीत राग हो जाता है वीत राग होने पर उसको तत्व ज्ञान हो जाता है कारण कि तत्व ज्ञान की प्राप्ति में नाशवान असत वस्तुओ का राग ही बाधक है ।
दुःखो के संयोग का जिसमें वियोग है, उसका नाम योग है, ये दोनो परिभाषायें वास्तव में एक ही है | दाद की बीमारी में खुजली का सुख होता है और जलन का दुःख होता है, पर ये दोनो ही बीमारी होने से दुःख रुप है, ऐसे ही संसार के सम्बन्ध से होने वाला सुख और दुःख दोनो ही वास्तव में दुःख रुप है । ऐसे संसार से सम्बन्ध विच्छेद का नाम ही ‘दुःख-संयोग-वियोग’ है । अतः चाहे दुःखो के संयोग का वियोग अर्थात सुख-दुःख से सहित होना कहे, चाहे सिद्दि-असिद्दि में अर्थात सुख-दुःख में सम होना कहे, एक ही बात है ।

Friday, 20 November 2015

किसान

किसानो को अगर अपनी आर्थिक दशा ठीक करनी है तो निम्न बातो पर ध्यान देना होगा । जिन किसानो के पास जमीन कम है उनके लिये ये सुझाव वरदान साबित होगे ।
(क) यूरिया जैसी रासायनिक खादो का प्रयोग अपने खेत में बन्द करना होगा और इसकी जगह गोबर, मूत्र से बनी खादो का प्रयोग करना होगा या डिकम्पोज खाद का प्रयोग करना होगा ।
(ख) रासायनिक कीटनाशक भी अपने खेतो में प्रयोग न करें । इनकी जगह जयपुर स्थित दुर्गापुर अनुसंधान केन्द्र ने देशी तकनीक से कीटनाशक बनाने की विधि विकसित की है इस देशी कीटनाशक के लिये छाछ व पानी में नीम के पत्ते, बबूल के पत्ते, धतूरे के पत्ते और आकड़ा या सहजना के पत्ते दोनो में से एक का उपयोग किया जाता है । इसमें कोई जहरीला पदार्थ नही है जो किसी की सेहत को खराब करे । किसान के मित्र कीड़ो को कोई नुकसान नही पहुँचता है । नेट पर सब मिल जायेगा फिर भी अगर किसी को कोई समस्या है तो सम्पर्क करे पूरी जानकारी भेज दूगाँ मोब- ०७५३१०३०५७१(07531030571) |
(ग) खेती के साथ पशुपालन जरुर करें । देशी गाय जरुर पाले, भैस, बकरी और कुत्ता ये सब भी पाले । इसके साथ ही खेती में पशु शक्ति का प्रयोग जरुर करें । ट्रेक्टर आदि मशीनो का प्रयोग बिलकुल न करे इससे प्रदूषण होगा, और आपकी लागत बढ़ेगी । बहुत ज्यादा जरुरत हो तभी मशीनो का प्रयोग करे ।

(घ) गोबर गैस प्लांट भी लगवाये जिससे आपके रसोई में साफ सुधरी गैसे से खाना पकाया जा सके और गोबर की खाद भी मिलेगी । ये सरकार किसानो के लिये मुफ्त में लगवाती है आप अपने जिला अधिकारी से मिले ।

(ङ) सब्जियो या फूलो की खेती करे जिससे आपको तुरन्त रकम मिल सके । 

किसानो से अनुरोध है कि अपना समय बरबाद न करे ताश के पत्ते इत्यादि न खेले सुबह सूर्य उदय से डेढ़ घंटे पहले उठे, योग करे फिर किसानी करे । शराब, बीड़ी, सिगारेट, तम्बाकू से बचे ये चीजे खराब है बिमार बनाती है पैसा खपाती है इनको करोगे तो परिणाम गलत होगा । अपने घर और गाँव के आस पास खूब पौधे लगाओ साफ हवा का आनन्द लो ।

जल बरबाद न करें

जल ही जीवन है । ये सही है कि जल के बिना जीवन असम्भव है । लेकिन आजादी के बाद, आज हमारे देश की आबादी दुगनी से ज्यादा हो चुकी है लेकिन जल स्रोत उतने ही है और गंगा जमुना जैसी बड़ी-बड़ी नदियां दूषित हो चुकी है । आज शहर व गाँव सब पानी की समस्या से जूझ रहे है । अब इस समस्या से कैसे निबटा जाये ? गाँवो मे छोटे-छोटे तालाबो का निर्माण किया जाना चाहिये । जिससे गाँव के पशुओ और लोगो की रोजमर्रा की जरुरतो को पूरा किया जा सके । इसके साथ-साथ गाँवो व शहरो के लिये जल संरक्षण किया जाना चाहिये । जो पीने के पानी की पूर्ति करेगे गाँवो शहरो के लिये पीने योग्य पानी के लिये कोई देशी प्रोजेक्ट विकसित किया जाना चाहिये जो रेन वाटर हरवेस्टिग के साथ बिना बिजली के चले जिसमें खर्च नाम मात्र का होना चाहिये । ऐसी तकनीकी का हमें विकास करना होगा । दूसरा पक्ष है कि जिसमें, हम पानी का सही इस्तेमाल कैसे करें ? लिखा देखा होगा कि जल बचाओ, जीवन बचाओ इसलिये हमें व्यर्थ में पानी बरबाद न करे । जल की बरबादी इस प्रकार से होती है । नल में पानी का टपकना, पानी का पाइप लीक करना, व्यर्थ में नलका चलता छोड़ देना, पानी की टंकी ओवर फ्लो होना । अब इस बरबादी को कैसे रोका जाये ? क्रमशः इनको तुरन्त ठीक करवाओ, जो भी देखे टोके और बन्द करे, पानी की टंकी में वाटर ओवर फ्लो अलार्म जरुर लगवाये इससे बिजली और पानी दोनो बरबाद होने से बचेगे । ज्यादा पानी बरबाद करने से घर में वास्तुदोष होता है इसके कारण दरिद्रता आती है और पानी टपकने से कर्ज चढ़ता है । देख लो दोस्तो गेद आपके पाले में है ।

गीत ज्ञान

जो लड़ाई योग्य पुरुष है, वे तो युद्द में मारे जाते है किन्तु जो लड़ाई के योग्य नही है, ऐसे जो बालक और स्त्रियाँ पीछे बच जाती है, उनको अधर्म दबा लेता है । कारण कि जब युद्द में शस्त्र, शास्त्र, व्यवहार आदिके जानकार और अनुभवी पुरुष मर जाते है, तब पीछे बचे लोगो को अच्छी शिक्षा देनेवाले, उनपर शासन करने वाले नहीं रहते । इससे मर्यादाका, व्यवहारका ज्ञान न होने से वे मनमाना आचरण करने लग जाते है अर्थात वे करने लायक काम को तो करते नहीं और न करनेलायक कामको करने लग जाते है । इसलिये उनमें अधर्म फैल जाता है ।

Thursday, 19 November 2015

शोषण और भ्रष्टाचार

शोषण वही होगा जहाँ अपने अधिकारो के प्रति जागरुकता नहीं होगी । गरीबी का भी शोषण होता है । मजबूरी का भी शोषण होता है इन्सान-इन्सान का शोषण करता है । एक अमीर, गरीब का शोषण करता है । आखिर में ये शोषण ही भ्रष्टाचार का रुप ले लेता है । ये सरकारी मुलाजिम, नेता या कोई संस्था कितना ही दवा कर ले कि भ्रष्टाचार कम हुआ । लेकिन विगत दिनो में भ्रष्टाचार ज्यादा हुआ है कम नहीं हुआ । अगर एक साधारण या मजदूर नागरिक कहे कि भ्रष्टाचार कम हुआ तो इसे माना जा सकता है क्योकि एसे नागरिक इस समाज में या सरकारी तंत्र में जीते या रहते है ये लोग आये दिन भ्रष्टाचार के शिकार होते है और जमीनी सच्चाई से जुड़े होते है । आपने कई नेताओ को कहते सुना होगा या टी.वी पर देखा हो कि “देश जानना चाहता है” या “देश की जनता जनना चाहती है” । नेताजी देश सब जानता आप देश की जनता को बीच में मत घसीटो ।

गृह क्लेश

कहते है कि पति पत्नी में प्यार में तकरार हो तो दोनो में प्यार बड़ता है । लेकिन घर में यही तकरार इतनी बड़ जाय कि ये गृह क्लेश का रुप धारण कर लें । जो कि किसी परिवार के लिये गम्भीर है । पति पत्नी के बीच झगड़े क्यों होते है ? ये रिश्ता बहुत ही नाजुक होता है इसमें एक दूसरे को समझना बहुत जरुरी है । पति पत्नी के बीच झगड़े के निम्न कारण हो सकते है (क) एक दूसरे के विचारो में समानता न होना (ख) एक दूसरे का सम्मान न करना (ग) आपस में प्रतिस्पर्धा का होना (घ) दोनो का मूर्ख होना । इसके अलावा, इसके और भी कारण हो सकते है । और ये गृह क्लेश पढ़े लिखे या कम पढ़े लिखे लोगो में हो सकता है । पति-पत्नी दोनो में से अगर एक भी समझदार होगा तो गृह क्लेश होगा ही नही अगर हो गया तो इसको काबू किया जा सकता है । इससे हम और आप कैसे बच सकते है ? इससे बचने के लिये मौन बने सबसे अच्छा उपाय है । हर बात में अपनी राय या टीका टिप्पणी ना करें । अपने पार्ट्नर को नजदीक से समझने की कोशिश करे और ऐक दूसरे का सम्मान करें । एक गुस्सा करे तो दूसरा चुप रहे इसके अलावा अपनी गलती को स्वीकार करें और सोरी कहना सीखे । अगर कोई अच्छा काम करे तो उसको कोम्लीमेंट जरुर दें अगर खाना अच्छा बना है तो जरुर कोम्लीमेंट करें । इसके अलावा गृह क्लेश के बहुत कारण हो सकते है कारण तलाशे और उस पर गौर करे, मंथन करे और समाप्त करे । दोस्तो ये जिन्दगी अनमोल है किसी भी हालात में खुद खुशी की ना सोचे और न किसी को भी सोचने दें । हर समस्या का समाधान है सिर्फ विचार करने की जरुरत है । 

गीता ज्ञान

मनुष्य कर्म करने में स्वतन्त्र और फल प्राप्ति में परतन्त्र है । परन्तु अनुकूल-प्रतिकूल रुप से प्राप्त परिस्थिति का सदुपयोग करके मनुष्य उसको अपने उद्दार की साधन सामग्री बना सकता है । क्योकि यह मनुष्य शरीर अपने उद्दार के लिये ही मिला है । मनुष्य को कर्म करना चाहिये और फल की इच्छा कभी ना करे । वो कुदरत या भगवान अपने आप देता है ।

Wednesday, 18 November 2015

                                          15 Sep 1926  - 17 Nov 2015

हिन्दू ह्र्दय सम्राट अशोक सिघलजी हमे छोड़ गये
राष्ट्रहित मे किये गये आपके प्रयास को देश कभी नहीं भूल सकता

कोटि-कोटि नमन  

आंतकवाद से कैसे लड़ा जाये

आंतकवाद से भारत बुरी तरह से ग्रसित है सन १९९० में आंतक शुरु हो चुका था और आज तक कोई कमी नहीं हुइ है । सवाल है कि आंतकवाद से कैसे लड़ा जाये ? इससे लड़ने के लिये पूरे देश, समाज, हर वर्ग, प्रत्येक राजनीतिक दलों मे एकता होना अति आवश्यक है । इसके साथ मजबूत इरादे वाली सरकार और आदर्श विपक्ष होना चाहिये । लेकिन ऐसा विपक्ष हो तो क्या करे ? ये पाकिस्तान की बात है । हाल ही में पाकिस्तान के किसी पत्रकार से मणि शंकर अय्यर जी ने बोला कि “इनको (मोदीजी) को हटाओ और हमे (कांग्रेस) लाओ” पाकिस्तानी पत्रकार बोला “हम कैसे हटा सकते है” ? “ये तो आप हटा सकते है” अय्यरजी बोले कि “फिर आपको वेट (इन्तजार) करना पड़ेगा” पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद जी भी मौजूद थे । इतिहास गवाह है अजादी के बाद ज्यादातर कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में रही है आज देश में जो परिस्थितियाँ है जैसे आंतकवाद, विकास, मँहगाइ, किसानो की समस्या, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और बहुतसारी समस्याऐ जिनके लिये मोदीजी की सरकार जिम्मेवार नही है उसमें कांग्रेस पार्टी ही पूरी तोर पर जिम्मेवार है । आज अय्यरजी अगर ऐसे ही भारत के खिलाफ पाकिस्तान में जाकर बयान वाजी करोगे तो कांग्रेस पार्टी को भारतवासी उखाड़ फेकेगे । बिहार में अगर २५ सीटे मिली है तो उनका सम्मान करना सीखो न कि पाकिस्तान में जा कर ऐसी बयानबाजी करो । विपक्ष कैसा भी उससे कोई फर्क नही पड़ता लेकिन इस देश की वर्तमान मोदी जी की सरकार इस आंतकवाद से अकेले लड़ने में पूर्ण रुप से सक्षम है ।

माता पिता

जिन माता-पिता ने जन्म दिया, बच्चो का पालन पोषण किया, पढ़ाया लिखाया और एक अच्छा इन्सान बनाया । क्या उनका सम्मान नहीं करना चाहिये ? माँ खुद गीले में सोती है और बच्चे को सूखे में    सुलाती है । क्या बच्चो को वॄद्दा अवस्था में माता-पिता की देख-रेख नहीं करनी चाहिये ? लेकिन आज के स्वार्थी बच्चे देख-रेख करने की बात तो दूर उल्टा माता-पिता को काम वाला बना देते है । एसा नही है कि सब बच्चे एक जैसे हो, कई बच्चे बड़े संस्कारी और आज्ञाकारी होते है अपने     माता-पिता की बहुत इज्जत करते है और हर समय देख-रेख भी    रखते है । जैसा करोगे वैसा भरोगे । कहा जाता है कि पिता अपने सब बच्चो को अकेला ही पालन पोषण करता है लेकिन जब पिता की बारी आती है तो माता-पिता को सब मिलकर पालते है इसके अलावा माता को पिता से अलग कर दिया जाता है कि छः माह बड़े बेटे के पास पिताजी रहेगे और छः माह छोटे बेटे के पास माताजी रहेगी इस प्रकार ये वो ओलाद है जिनके लिये कभी ये ही माता-पिता जान छिड़कते थे आज उन्हीं को देखो इन्होने कभी अपने बच्चो को अपने से अलग नहीं किया कभी चाचा या ताऊ के पास नहीं भेजा । इसीलिये सभी को अपने वृद्दा अवस्था के लिये बचत करे और योग करे ताकि अन्तिम समय तक किसी पर आश्रित न हो ।

आग को काबू रखे

आग जब तक सिमित रहे या कहे काबू में रहे बहुत अच्छी है । और सर्दियो में तो आग बड़ी प्रिय लगती है । अग्नि पवित्र होती है इसीलिये पूजा, पाठ और हवन में प्रयोग किया जाता है । मनुष्य के मरने पर शरीर को आग में समर्पित कर दिया जाता है । यही अग्नि अगर बेकाबू हो जाये तो जहाँ लगती है सब कुछ भस्म कर देती है, सब जला कर राख कर देती है । इस तरह किसी के मन में आग है अगर ये बदला लेने वाली आग है तो दोस्तो ये सब कुछ जलाकर राख कर देगी और यदि धनात्मक (पोजिटिव) आग है तो सबका भला होगा खुद का भी भला होगा । एक धनात्मक आग जो भला करती है भला का उल्टा लाभ होता है । दूसरी ऋणात्मक आग हमेशा नुकसान पहुँचाती है । ऐसी आगो से बचना चाहिये और खास कर सर्दियो में आग से सावधान रहना चाहिये । गैस चुल्हा और गैस सिलेन्डर का रख रखाव ठीक से रखे और पूरी सावधानियाँ बरते

गीता ज्ञान

सासारिक भोगो का अन्त नहीं है । अनन्त ब्रह्माण्ड है और उनमें अनन्त तरह के भोग है । परन्तु उनका त्याग कर दे, उनसे असंग हो जाये तो उनका अंत आ जाता है । ऐसे ही कामनाते भी अनन्त होती है परन्तु उनका त्याग कर दें, निष्काम हो जाये तो उनका अंत आ जाता है ।

Tuesday, 17 November 2015

आंतकवाद, सरकार और पत्रकारिकता

आंतकवाद का खात्मा होना चाहिये । आंतकी हमला कही पर भी हो उसमें हमेशा निर्दोष लोग ही मारे जाते है । फ्रांस में हमला हुआ लेकिन वहाँ की पुलिस, प्रशासन और सरकार ने डेढ़ घंटे में इस हमले को निबटा दिया था । इतना होते हुये भी फ्रांस के नागरिको, सरकार और विपक्षी दलो के नेताओ ने कोई अनरगल बयानबाजी नहीं की इन सबो की राष्ट्रभक्ति और सूझ-बूझ को सेल्यूट करता हूँ । एक ही बयान आया हम सब राष्ट्रपति के साथ है । इसी तरह फ्रांस की मिडिया की रिपोटिंग भी काबिले तारीफ है । किसी भी नागरिक से फालतू के सवाल जबाव नहीं । कोई भी अनावश्यक द्रश्य नहीं दिखाया गया जिससे लोग विचलित हो और ना ही ग्राउड से ऐसी रिपोटिग की गयी जिससे आतकवादियो को किसी भी प्रकार की मदद मिले । नपी तुली और देशहित रिपोर्टिग की गयी इसे कहते है पत्रकारिकता इन सबको भी सेल्यूट |

नागरिक, परिवार और देश व राज्य

नागरिको में जागरुकता का होना अति आवश्यक है । अपने देश का सामान्य ज्ञान होना जरुरी है । राजनीति के बारे में ज्ञान होना बहुत जरुरी है । आज देश में सयुक्त परिवार क्यों बिखर गये ? इसका सीधा जबाव है आपस में बाप-बेटे मे, भाई-भाई में या अन्य परिवारजनो में मत भेद का होना, आर्थिक अनियमिताये, जमीन व घर को लेकर विवाद । इन सब विवादो की वजह से बाप बेटा से अलग, भाई-भाई से अलग हो जाते है । ये सब अपने परिवारो के प्रति कितने जागरुक है कि अपने खून के रिश्ते को तोड़ने में बिलकुल हिचकते नहीं । देश में, राज्यो में चुनावो के समय ये जागरुक क्यों नहीं होते ? हम क्यो जाति के पीछे पड़े रहते है ? राज्यो को हम क्यो नहीं अपना घर मानते है ? एक शराब की बोतल में, क्यों अपने वोट को बेच देते है ? क्या राज्य हम सबका परिवार नहीं है ? परिवार में हम फैसले लेते समय रिश्ते-नाते खून को भूला देते है और सही फैसला करते है तो राज्य या देश में क्यो नही ? इस विषय पर बड़े गम्भीर सवाल उठते है । हमारे देश में ये सब कुछ आजादी के बाद से चल रहा है । और ये हम सब लोग झेल भी चुके है और आगे भी झेलेगे मुँह बंद करके ।

थोता चना बजे घना

अज्ञानी और मूर्ख लोग गाल ज्यादा बजाते है । आखिर ये लोग क्यो चिल्लाते है ? जैसे ढोलक या खाली पीपा पर थोड़ा डंडा मारो ज्यादा शोर करेगा । लेकिन गेहूँ से भरा पीपा पर डंडा मारने से शोर या आवाज नहीं होगी अगर ज्यादा मारोगे तो डंडा ही टूट जायेगा । क्योकि इसमें वजन है । इसी तरह अज्ञानी और मूर्ख लोग बक-बक बहुत करते है क्योकि अन्दर कुछ है ही नहीं ये खाली पीपा या कनस्त होते है । ज्ञानी और समझदार लोग, शान्त स्वभाव, अपने कर्म और कर्तव्यों पर ध्यान देते है । बजाय शोर और चिल्लाने के । इनके सामने मूर्ख व्यक्ति कभी टिक ही नही सकता । चिल्लाते-चिल्लाते खुद ही टूट जाता है क्योकि ज्ञान का प्रभाव इतना होता है कि मूर्ख को टूटना ही पड़ता है । प्रभाव इतना विलक्षण होता है कि मूर्ख, दुष्ट, गददार, राष्ट्रविरोधी एक हजार हो इनके लिये ज्ञानी पुरुष या देशभक्त एक ही काफी है ।

गीता ज्ञान

शब्द, स्पर्श, रुप, रस और गंध – ये पाँच विषय शरीर का आराम, मान और नामकी बड़ाई – इनके दावारा सुख लेने का नाम ‘भोग’ है । भोगो के लिये पदार्थ, रुपये-पैसे, मकान आदि का जो संग्रह किया जाता है, उसका नाम ‘ऐश्वर्य’ है । इन भोग और ऐश्वर्य में जिनकी आसक्ति है, प्रियता है, खिंचाव है अर्थात इनमें जिनकी महत्वबुद्दि है, उनको ‘भोगैस्वर्यप्रसक्तानाम’ कहा गया है । जो भोग और ऐश्वर्य में ही लगे रहते है, वे आसुरी सम्पत्तिवाले होते है । कारण कि ‘असु’ नाम प्राणों का है और उन प्राणो का है और उन प्राणों को जो बनाये रखना चाहते है, उन प्राणपोषण परायण लोगों का नाम ‘असुर’ है ।

Friday, 13 November 2015

क्या एक देश भक्त के सामने ? राष्ट्र विरोधी ताकते टिक पायेगी

हमारे देश का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य (मोटो) है “सत्यमेव जयते” जो कि आजादी के बाद इसे अपनाया गया जो कि हमारे शास्त्रो (उपनिषद) से लिया गया है । इसका अर्थ है कि सत्य की हमेशा जीत होती है । और ये सही है सत्य अब भी जीतेगा इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिये । लेकिन कुछ राष्ट्र विरोधी तत्वों ने इसका मतलब उल्टा करने की कोशिश की है । ये राष्ट्र विरोधी ताकते देश के खिलाफ षडयन्त्र रच रही है हिन्दू-मुस्लिम के बीच अफवाहे फैलाकर, गौमाता को बीच में लाकर और मिडिया का भी सहारा ले कर विदेशो में भारत की छवि को खराब करने की कोशिश लगातार चल रही है । देश विरोधी ताकतो ने बुद्दिजीवी वर्ग को भी अपनी तरफ कर लिया है । ये देश विरोधी ताकते देश के विकास को तो कमजोर कर रही है लेकिन एक आंतकवादी देश पाकिस्तान को हवा देने तक की कोशिश की जा रही है । ये देश विरोधी ताकते चाहे कितने ही सडयन्त्र क्यो न रचो ? लेकिन ये दुष्ट लोग अपने मनसूबो में कभी भी कामयाब नहीं हो पाओगे और तुम्हारी जल्दी ही पोल खुल जायेगी और सत्य की ही इस बार भी जीत होगी और ये देश के दुश्मन सलाखो के पीछे होगे । देश की कोई संस्था या पार्टी सड्यन्त्रो या दुष्प्रचारो से आगे नहीं बड़ सकती । कई लोग अपना सारा वक्त सड्यन्त्रो और दुष्प्रचारो की योजना बनाने में लगे रहते है । हम तो भगवान से ये ही प्रार्थना करते है कि इन राष्ट्र विरोधी ताकतो को “सद बुद्दि दे” और सही रास्ते पर आये नहीं तो इनको समूल नष्ट करो भगवन । विनाश काले विपरीत बुद्दि । “सत्यमेव जयते”       

गीता ज्ञान

एक अहम के त्यागने से अनन्त सृष्टि का त्याग हो जाता है । क्योकि अहम ने ही सम्पूर्ण जगत को धारण कर रखा है जैसे कितनी घास क्यों न हो, क्या अग्नि के सामने टिक सकती है ? कितना ही अँधेरा हो, क्या प्रकाश के सामने टिक  सकता है ? अँधेरे और प्रकाश  में लड़ाई हो जाये तो क्या अँधेरा जीत जायेगा ? ऐसे ही आज्ञान और ज्ञान की लड़ाई हो जाये तो क्या अज्ञान जीत जायेगा ? महान से महान भय क्या अभय के सामने टिक सकता है ? समता थोड़ी हो तो भी पूरी है और भय महान हो तो भी अधूरा है ।

बाल दिवस (चिल्ड्रन डे)

बाल गोपालो को हमारी तरफ से ढेर सारी हार्दिक शुभकामनायें । बाल गोपाल स्वभाव से बड़े चंचल होते है । बच्चे देश व समाज के भविष्य है । आज के बच्चे कल के नेता होगे । इसलिये सभी मता और पिता को अपने बच्चो को देश भक्ति के संस्कार और उचित शिक्षा दें । जिससे इन बाल गोपालो का भविष्य उज्जवल हो ।

Wednesday, 11 November 2015

पोलिथीन बेग से खतरनाक प्रदूषण

आज के परिवेश में पोलिथीन बेग बहुप्रयोगीय वस्तु है । इसके फायदे कम नुकसान ज्यादा है । मेरे विचार से पोलिथीन बेग अप्राकृतिक है इसलिये इसका प्रयोग लाभदायक नहीं है । ये अपने स्वार्थ के लिये या व्यक्तिगत लाभ के लिये इसे लाभदायक मानना गलत है । पोलिथीन बेग पर्यावरण के लिये एक बड़ा खतरा है । इससे वायु, पानी और मिटटी का प्रदूषण होता है जो कि मनुष्य और जीव जन्तुओ के लिये बहुत बड़ा संकट है । आप अपनी-अपनी तरह सोच रहे होगे कि वायु, पानी और मिटटी से इसका क्या लेना देना ? दोस्तो इस पोलिथीन बेग को लोग कचरा में जलाते है दिल्ली में रोज पोलिथीन बेग और प्लास्टिक जलाया जा रहा है इसके अलावा नदी, नालो, गटर और पानी के पाइपो में सड़ रही है पानी निकासी मे ब्लोकेज (बाधाँ) कर रही है । जमीन मे इसकी परते बन चुकी है | हमारी नदियाँ, नाले, ड्रेनेज सिस्टम सब के सब पोलिथीन बेग और प्लासटिक से भरे पड़े है । कोई भी सरकारे इस मुद्दे पर न तो देश में कानून अमल में लाना चाहती है ना ही किसी तरह के इन्तजामात करना चाहती है । कानून बहुत है लेकिन मन मानी है कोई नहीं मानता इसके साथ ही हमारे नागरिक ही इतने जागरुक होते तो, सब कुछ खुद ही ठीक-ठाक कर ले वो भी नहीं है । दोस्तो ये समस्या खत्म कैसे हो ? दिल्ली और केन्द्र दोनो सरकारो से हम सभी का आग्रह है कि इस समस्या का कुछ समाधान निकाला जाये । वैसे तो ये पूरे देश की समस्या है । पोलिथीन बेग का इतना ज्यादा इस्तेमाल बड़ा है कि भविष्य में बहुत बड़ी गड़्बड़ होने वाली है । दोस्तो इसको एक आन्दोलन बना दो इतना शेयर करो और सब हाकिमों को लिखो ताकि ये हमारी सोयी हुई सरकारे जागे इस समस्या के लिये कुछ करे ।

गीता ज्ञान

सुख आता हुआ अच्छा लगता है और जाता हुआ बुरा लगता है । तथा दुःख आता हुआ बुरा लगता है और जाता हुआ अच्छा लगता है । अतः इसमें कौन अच्छा है कौन बुरा ? अर्थात दोनो ही समान है बराबर है इस प्रकार सुख दुःख में समबुद्दी रखते हुऐ तुझे अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए । तेरी किसी कर्म में सुख के लोभ से प्रवृत्ति नहो और दुःख के भय से निवृत्ति न हो । कर्मो में तेरी प्रवृत्ति शास्त्र के अनुसार हो ।

शुभकामनाये

दिवाली के प्रकाश पर्व पर आप सबो और आपके परिवारो को ढेरसारी शुभकामनाये (देरी का कारण नेट खराब था)।
दोस्तो पटाखो और बाजार की दूषित मिठाईयों से बचे | प्रदूषण रहित और सुरक्षित दिवाली मनाये । दिवाली पर अपने छोटे और ना समझ बच्चो को अकेला न छोड़े और उनका ध्यान जरुर रखे ।
पुनः आप सभी को दिवाली पर बहुत-बहुत शुभकामनाये

Saturday, 7 November 2015

बाजार की मिठाईयो से बचे

देश में दुधारु पशुओ की संख्या दिनो दिन घटी है आज गाँवो में लोग पशु कम पालते है किसान खेती ट्रेक्टर से करवाता है और खाद यूरिया की डालता है । पशुधन गाँवो में लोग कम पालते है । लेकिन आज बाजार में मावा (खोया) की कोई कमी नहीं है । पनीर की कोई कमी नहीं और दूध व दही की भी कोई कमी नहीं । इसके साथ ही असली और नकली की भी कोई पहिचान नहीं । आज भी कई जगह मिलावटी मवा टनो मे पकड़ा गया है । फिर भी नकली खोया की मिठाईयाँ बाजार में सरे आम बिक रही है । इस देश में कुछ लोग सहिष्णुता की बात करते है ये वे ही लोग है जो एक आंतकवादी के लिये रात में दो बजे देश का सबसे बड़ा और आदरणीय उच्च न्यायलय को खुलवा देते है । और वे लोग जो अपने तक्मे और पुरुस्कार वापस करने वाले । अब आओ सामने और इन मिलावटखोरो के लिये कुछ करो ये बिगाड़ रहे है बच्चो की सेहत, देश से खिलवाड़ कर रहे है । खैर ये क्या करेगे हमारे लिये । हमें बाजार की मिठाईयो से बचना होगा और अपने घर पर ही मिठाईयाँ बनाये जैसे जलेबी, समोसा, बेसन के लड्डू और बर्फी, गुलाब जामुन इत्यादि बना सकते हो । विदेशी कम्पनियों या लोकल हलवाहियो पर विश्वास मत करो । तुलसीदा ने ठीक कहा है “पराधीन सपनेहु सुख नाही” इसलिये दोस्तो हम अपने बच्चो व परिवार को इस जहर से बचाये और आप सभी को सुरक्षित दिपावली की बहुत बहुत शुभकामनाये

शिक्षा प्रणाली

हमारी शिक्षा प्रणाली अंग्रेजो से प्रेरित है । शिक्षा भेदभाव पूर्ण है । आज भारत में शिक्षा व्यवसायिक बन चुकी है । जिसके कारण अमीरो के लिये अलग शिक्षा और गरीबो के लिये भी अलग शिक्षा के मान दण्ड है । फिर भी भारत में शिक्षा का स्तर बहुत घटिया है भारत के कई प्रदेशो में लड़का प्रथम श्रेणी से पास होगा लेकिन ठीक से लिख पढ़ भी नहीं सकता । ये मैने बहुत सारे बच्चे ऐसे देखे है और शिक्षा का इतना खराब स्तर फिर भी महँगी शिक्षा है । सरकारी और प्राईवेट शिक्षा अपनी मन माने ढग से फीस वसूलते है और इनके पास शिक्षक भी अनुभवहीन होते है ये ही हाल सरकारी स्कूलो का भी है । टयूशन के लिये भी कई गुना फीस ऐठते है लेकिन स्कूल या कोलेज में बच्चो पर ध्यान नहीं देते । १५ अगस्त १९४७ के बाद सरकार ने भी शिक्षा के क्षेत्र में कोई ध्यान नही दिया । ये देश का बड़ा दुरुभाग्य है । आज की शिक्षा से एक अच्छा लिपिक तक नही बन सकता और न इससे कोई रोजगार मिल सकता है । वर्तमान सरकार को शिक्षा में सुधार करने चाहिये । आचार्य कुलम भी भारतीय शिक्षा के लिये एक अति उत्तम विकल्प है । ये बाबा रामदेव की एक परम्परागत पहल है । इस पर भी सरकार को विचार करना चाहिये ।

Friday, 6 November 2015

बेरोजगारी जस की तस है

आजादी के बाद देश युवा था और आज भी विश्व में भारत युवा देश है लेकिन यह भी सही है कि देश का नौजवान बेरोजगार भी है । मेरे मन में सवाल उठता है कि इतना बड़ा देश और प्राकृतिक संसाधनो से सम्पन्न फिर भी युवाओ को काम नहीं । मैं भी युवा था सन १९८३-८५ तक बेरोजगारी और आरक्षण की मार झेल रहा था । उस समय भी बेरोजगारी अपनी चर्म पर थी और हमारी गरीबी भी अति नीचे पायेदान पर थी मैने कितने धक्के खाये उसके बाद बड़ी मुश्किल से आर्मी जोइन की । युवाओ की पढ़ाई का खर्च और घर के आर्थिक हालत इन सबसे झूजना पड़ता है । बेरोजगारी १९८० के दशक में भी ऐसे ही हालात थे जैसे आज है कोई फर्क नहीं है । इस बेरोजगारी के कारण क्या है ? क्या हमारी अबादी की वजह से है ? क्या हमारी राजनीति इच्छा शक्ति की कमी है ? आजादी से आज तक आखिर बेरोजगारी के लिये कौन जबावदेह है ? क्या भ्रष्टाचार या घोटाले इसके लिये जिम्मेदार है ? इसका उत्तर सिर्फ और सिर्फ हमारा इतिहास दे सकता है । इतिहास में सब दर्ज है किसने कितने तीर मारे है ?   

संगत

किसी भी मनुष्य की अगर संगत या माहोल ठीक नही है तो उसे परेशानियो का सामना करना पड़ सकता है । तुलसीदास ने रामायण में कहा है कि “दुष्ट संगत नही देय विधाता, जाते भलो नरक को वासा” इसका अर्थ है कि भगवान दुष्ट और कुकर्मी का साथ न दे भले ही नरक में स्थाई जगह दे दें । दुष्ट का संग कितना खतरनाक होता है इस दोहे से स्पष्ट हो जाता है । संगत का असर जरुर पड़ता है जैसे एक बालक जो पढ़ाई में कमजोर है लेकिन इसके दोस्त बुद्दिमान है यानी संगत पढ़ने लिखने वाले बालक है तो कमजोर होते हुए भी यह बालक अपना काम निकाल ले जायेगा । इसके विपरीत दूसरा बालक जो पढाई लिखाई में तेज है लेकिन उसका साथ झगड़ालू व चोरी-चपाटी वाले बच्चो के साथ है । यह बालक चाहते हुए भी नहीं पढ़ सकता क्योकि बालक मन बड़ा ही चंचल और कोमल स्वभाव का होता है । ऐसे में यह बालक वैसी ही आदते सीखेगा जैसे बालको के साथ रहता है । और पढ़ाई में तेज होते हुए भी ये असफल हो जयेगा । क्योकि संगत खराब है । अगर योवन में १३-१७ साल के उम्र में अगर बालक को सही दिशा निर्देश मिले तो १७ के बाद में इतनी समस्या नहीं होगी लेकिन थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा । ये बालक और बालिकाओ दोने के लिये है । १७ वर्ष के बाद बालक और बालिकाओ के साथ दोस्त या भाई-बहन जैसे रहे और बच्चो से हर बात शेयर करे । उनके दोस्तो के बारे में बात करे और पढ़ाई, खेल, पिकनिक और घर की छोटी बड़ी समस्याओ के बारे में बच्चो की भी राय ले । उन पर छोटी- छोटी जिम्मेदारी भी डाले बाहर के काम भी दें फीस भी उनसे जमा करवाये । जब बच्चा अपने स्कूल या कोलेज की हर छोटी बड़ी बात आपको बताने लगे तो समझो वो आपका दोस्त बन चुका है अब आपके बच्चे को कोई नहीं बिगाड़ सकता है । इन सबके साथ बच्चो की संगत का जरुर ध्यान रखे । बचपन से ही अच्छी आदते और संस्कार डाले ।

Wednesday, 4 November 2015

देश के अच्छे वातावरण को बिगाड़ने की कोशिश

देश की १२५ करोड़ भारतीय आपस में मिल-जुल कर प्रेम से रह रहे है । लेकिन अपने ही वे लोग जो देश की कुर्सी के बिना नहीं रह सकते वे लोग देश की एकता और अखण्डता को तबाह करना चाहते है ये लोग मिडया का सहारा ले कर देश मे दंगे फसाद करवाने पर तुले हुये है । ये लोग जानबूझकर झूठ को सच साबित करना चाहते है । आज जी न्यूज पर एक वीडिओ दिखाया गया जिसमें एक पत्रकार भाई एक बच्चे को शराब का एक क्वार्टर देता है और बोलता है ऐश कर और उस मासूम बच्चे को पता नहीं क्या-क्या बोलने के लिये मजबूर कर रहा है ये पत्रकार महाशय कोई क्रान्तिकारी चैनल के है पक्का मुझे भी नही पता कि बो किस चैनल का है देख लेना पता लग जायेगा । देखो ये कितना घिनोनी पत्रकारिता है । आज जी न्यूज टी.वी और इन्डिया टी.वी दोनो प्रशंसा के पात्र है हमेशा ये दोनो न्यूज चैनल देशहित में सच्ची और शुद्द खबरे दिखाते है । और साथ ही ऐसे दुष्ट चैनल का पर्दाफास करते है । ये तथाकथित क्रान्तिकारी चैनल किसी न किसी ने खरीदा होगा । इसकी सी.बी.आई दवारा जाँच होनी चाहिये और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाना चाहिये । ये देश को अपने निजि स्वार्थ के लिये अस्थिर करने की बहुत बड़ी चाल है । इसका जबाव १२५ करोड़ भारतीय को चुनाव के वक्त देना चाहिये और जबाव दिया भी है । इन देशद्रोहियो को उखाड़ फेको और बिहार इनको जरुर जबाव देगा और उखाड़ फेकेगा अवश्य ।

शरीर पर दुःख और खुशी का प्रभाव

दुःखी मनुष्य का अर्थ है भावुक हो जाना और दुःख में शरीर की ऊर्जा का क्षय होता है । इसमें आँखो में आसू आना और चेहरा मुरझा जाता है । ये लक्षण है ऐसी दशा में भी नेगेटिव सोच होती है जबकि गुस्से में मनुष्य नेगेटिव ऊर्जा का उत्सर्जन होता है । ऐसे हालात में मनुष्य थक और कमजोर पड़ जाता है दुःख व गुस्सा में मनुष्य के शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़्ता है । इससे शरीर के आन्तरिक अंगो दवारा जहरीले रासायनिक पदार्थो का स्राव होता है जिससे कब्ज, गैस, ह्रदय रोग या दिमाकी रोग होने सम्भावना बड़ जाती है । इसलिये दुःख को स्थाई न होने दे । ज्यादा समय के लिये दुःख अति दुःखदायी हो जाता है ।
खुशी में मनुष्य के शरीर में ऊर्जा का संचार हो जाता है और ऐसे माहोल में शरीर ऊर्जावान हो जाता है । पूरा शरीर अच्छी तरह से काम करता है इसलिये प्रत्येक मनुष्य को खुश और प्रसन्न रहने की कोशिश करनी चाहिये ।

गीता ज्ञान

१. स्वधर्म को ही स्वभावज कर्म, सहजकर्म, स्वकर्म आदि नामो से कहा गया है । स्वार्थ, अभिमान और फलेच्छा का त्याग करके दूसरे के हितके लिये कर्म करना स्वधर्म है स्वधर्म का पालन ही कर्म योग है ।

२. धर्म का पालन करने से लोक-परलोक दोनो सुधर जाते है । तात्पर्य है कि कर्तव्य का पालन और अकर्तव्य का त्याग करने से लोक की भी सिद्द हो जाती है और परलोक की भी ।

Tuesday, 3 November 2015

प्रदूषण रहित दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाये

किसी विदेशी एजेन्सी ने सर्वे कर बताया कि दिल्ली सबसे प्रदूषित शहर है ये तो सही है और ये भी सही है कि ये सबसे गन्दा भी है । दिवाली त्योहार की वजह से प्रदूषण और बड़ने के आसार है । सवाल है कि प्रदूषण रोका कैसे जाये ? ये हम सबकी जाबावदारी है कि दिवाली बिना पटाखे और फुलझड़ी चलाये मनायें । बड़े तो मान जायेगे लेकिन बच्चो का क्या ? बच्चे भगवान का रुप होते है उन्हें समझाओगे और सच्चाई बताओगे तो वे भी मान जायेगे । जो तुम पटाखे और फुलझड़ी चलाओगे इससे जहरीली गैसे निकलती है जो कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड जहरीली गैसे निकलती है जिनसे बच्चे और बूढ़े दादा व दादी बीमार पड़ जाते है पटाखे और फुलझड़ी की वजह से आक्सीजन (प्राण वायु) नहीं मिलपाती जो हमे हरे-भरे पेड़-पौधो से मिलती है । बच्चे अवश्य मान जायेगे उन्हें पटाखे और फुलझड़ी की जगह अच्छी मिठाई, चोकलेट, फ्रूट कई तरह के और नये कपड़े और फूलो से दिवाली मनाये बच्चो को सुरक्षित रखे जलने से बचाये । इस तरह अपने आस-पास का वातावरण स्वच्छ बनाओ । आप सभी को देश और विदेशो में बसे भारतीयो को प्रदूषण रहित दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाये ।

सीमा पार आंतकवाद

किसी ने ठीक ही कहा है कि पड़ोसी देश बदले नहीं जा सकते । अच्छा पड़ोसी देश होने से दोनो देश विकास कर सकते है और दोनो देशो के नागरिक शान्ति से रह सकते है इसीलिये भारत ने अपनी सीमाओ पर कटीले तारो की बाढ़ लगादी इसके अलावा पूरी सेना भी लगा दी और रात के समय बाढ़ के साथ-साथ बड़ी लाइटे भी लगा दी । हमारी सरकार ने अरबो रुपये खर्च कर दिये । इसके बावजूद पाकिस्तान आंतक करने पर आमदा है । १९४८ से आज तक चार युद्द दोनो के बीच में हो चुके है सभी में हमारी सेना ने बुरी तरह से धोया है । आज पाकिस्तान देवालिया बन चुका है इसलिये अपनी फौज को तनुखा समय पर नहीं दे सकता है । इतने बेकाबू हालत होने पर भी पाकिस्तान की फौज और आई.एस.आई अपनी हरकतो से बाज नहीं आ रही । भारत ने कई रक्षात्मक उपाय इस आंतकवाद से बचने के लिये किये । इसका प्रभाव भी पड़ा लेकिन उतना नहीं । क्योकि जम्मू-कश्मीर में कुछ अलगाववादी गुट जो पाकिस्तान को खुलेआम समर्थन करते है उनको कुचलना होगा क्योकि सीमा पार से आंतकवाद को यहाँ पनाह दी जा रही है और आजादी के बाद ये राष्ट्र विरोधी ताकते ने सर नहीं उठाया क्योकि इनको संरक्षण प्राप्त था और अब भी जिस देश में एक आंतकवादी की फाँसी रुकवाने के लिये रात के दो बजे सुप्रीम कोर्ट खुलवाया जाता हो । आप और हम भयभीत हो जायेगे भारत में सभी को कितनी आजादी है फिर भी देश विरोधी ताकते देश के हालात ठीक नही बता रहे है । उदाहरण और भी है सच सबको कड़वा लगता है । सबसे पहले हमें अपने देश की सुरक्षा को मजबूत करना होगा । आशावादी बनो सब ठीक-ठाक हो जायेगा । पाकिस्तान से प्रायोजित आंतकवाद का फन कुचल दिया जयेगा किसी भी किमत पर । आजका भारत मजबूत हाथो में है किसी काम को अंजाम देने में सक्षम है । भारत माता की जय

संदेह

संदेह मनुष्य को अवनति की तरफ ले जाता है संदेह में मनुष्य किसी भी विचार या स्थिति पर अस्पष्ट की स्थिति में होता है । इससे वह मकड़ी के जाल की तरह उलझता चला जाता है और उसके मन की दशा बे तली के लोटे जैसी होती है । संदेह मन के दवारा इतना मनगढ़ंत और काल्पनिक बना देता है कि उसमें सच्चाई बिल्कुल नही होती ऐसा इन्सान छिप-छिप के सच्चाई जनना चाहता है । आमने-सामने बैठकर बात नहीं करना चाहता है । इसलिये जो मनुष्य संदेह करता है और जिस पर संदेह किया जाता है ये दोनो के लिये बड़ा घातक है पति-पत्नी, बाप-बेटे जो भी रिश्ता हो टूट जाते है या जान से मार भी दिये जाते है । संदेह से बचा कैसे जाये ? इससे बचने का ऐक मात्र रास्ता पोसिटिव सोच के साथ जितने लोग इस संदेह में आते है एक कप चाय और समोसो के साथ सभी बैठ कर बात करें । ये पहल संदेह करने वाले को करनी चाहिये । ९०% तक संदेह करने वाले झूठे साबित होते है । और १०% में सच होते है । धनात्मक सोच के साथ इसे सुलझाया जा सकता है ।

Monday, 2 November 2015

गुस्सा

गुस्सा हमारे शरीर में नेगेटिव ऊर्जा का उत्सर्जन करता है । गुस्सा मनुष्य को किसी भी बात या काम को लेकर हो सकती है जो उसके प्रतिकूल होता है । गुस्सा में कुछ मनुष्य अपने आपको नुकसान पहुँचाते है या घर की चीजो को तोड़ फोड़ कर घर को और यहाँ तक देश की सम्पति को तोड़-फोड़ या आगजनी करके नुकसान पहुँचाया जाता है । गुस्सा और उन्नित, विकास दोनो एक दूसरे के पूरक है क्योकि गुस्सा में नेगेटिव एनर्जी होती है और उन्नित या विकास में पोजिटिव ताकत की खपत है । गुस्सा से सभी को बचना चाहिये । गुस्सा आये तो ठंडा पानी पिये इधर उधर टहले और जिसके कारण गुस्सा आया उस विषय को बदली करे अपने दिमाक से और अपने किसी पसंदीदा बात के बारे में सोचे और थोड़ा हँसे इस तरह से गुस्सा को टाला जा सकता है । गुस्सा को टालना थोड़ा मुश्किल जरुर है लेकिन ना मुमकिन नहीं है । यहाँ एक मजबूत इच्छा शक्ति की जरुरत है । इस तरह नेगेटिव एनर्जी को पोसिटिव एनर्जी में बदली किया जा सकता है ।

अकेलापन


जब अकेलापन शताये तो सूर्य को, वृक्षो को, पहाड़ो को, भगवान को, और कलम को अपना साथी या मित्र चुनो । इनसे बात करो किसी हद तक आपका अकेलापन दूर होगा । आखिर अकेलापन क्यो होता है ? अकेलापन उस समय ज्यादा अखरता है जब अपने दूर हो जाते है । लेकिन आज के युग में मनुष्य अपने अन्तिम समय में अपने आपको अकेला ही पाता है क्योकि किसी के पास समय नहीं है । लेकिन मैं अकेलेपन को शान्ति का दूसरा रुप मानता हूँ ये समय है चाहे वो अन्तिम समय क्यो न हो ? हम सांसारिक लफड़ो से दूर भगवान के समीप पहुँच सकते है आधयात्मिक ज्ञान की तरफ बड़ सकते है । नही तो हमें पछतावा जरुर होगा और कहा जयेगा कि बचपन खेलकर खोया, जवानी नीदभर सोया और बुड़ापा देखकर रोया । अन्तिम पड़ाव में हमे महसूस हुआ कि शुरु से हमें अकेलेपन को ही चुनना था । खैर उस समय मै इतना जागरुक न होने की वजह से इस जिन्दगी का जीने का रहस्य समझ न सका शायद इसीलिये हमने शादी को चुना खैर मुझे पछतावा नहीं है क्योकि और भी इस रास्ते में रहस्य और कारण थे । लेकिन हमने या किसी ने जो चुना है उससे भागना नहीं चाहिये । अकेलापन सबका दूर होगा चाहे वो किसी भी कारण से हो, कोशिश करो किसी ने कहा है कि “कोशिशे हमेशा कामयाब होती और वादे अक्सर टूट जाते है”

कम बोलो और काम ज्यादा करो

जिन्दगी में कम बोलो और ज्यादा से ज्यादा काम करो । इसमें मुँह कम और दिमाक, हाथ, पैर अधिक चले । ज्यादा बोलने से और सोच समकझकर न बोलने से हमेशा विवादो में घिरे रहोगे । आजकल काम करने की आवश्यकता है । दुनिया को दिखावा न करे । अपने पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी से सीखे मई १९९८ पोखरन दो में न्यूक्लियर टेस्ट किया कानो-कान दुनिया में किसी को पता नहीं चला बड़े-बड़े देश आश्चर्यचकित थे । अमेरिका भी दंग रह गया था । देश के लिये कुछ करना है तो अति गुप्त बनो एक हाथ से काम करो दूसरे हाथ को पता नहीं होना चाहिये । आज देश में येन्टी नेशनल एलीमेन्ट बहुत है कही भी हो सकते है । किसी की बात मत सुनो देश हित में काम करो । आपके काम को देश की जनता देख रही है और जो काम हुए है वो सबको दिखायी दे रहे है । अगर मुठ्ठी भर लोग भोकते है तो भोकने दो खुद पगला जायेगे । देशहित में सिर्फ काम करो ज्यादा मत बोलो और कोई पोस्टर मत लगाओ । अगर काम करोगे तो जनता के हिरो बन जाओगे । अगर ज्यादा बोलोगे और षडयंत्रकारी बनोगे तो डबल जीरो हो जाओगे । और इससे पतन निश्चित है ।

Sunday, 1 November 2015

देश में अमीर और अमीर, गरीब और गरीब हुए है

कहा जाता है कि गरीबी एक अभिशाप है । लेकिन ये प्रकृति दवारा प्रदत्त नहीं है । और नाही कुदरत ने किसी को गरीब और अमीर पैदा किया । प्रकृति जो भी देती है मुफ्त देती है और हवा, पानी, जमीन सब कुछ मुफ्त में ही प्रदान किया है । देना ही प्रकृति का दूसरा नाम है । गरीबी क्या है ? हम कह सकते है कि गरीबी अभाव है । गरीबी क्यो है ? गरीबी का प्रमुख कारण मुद्रा है जिसे अंग्रेजी में Currency भी कहते है । जिस दिन इस दुनिया में मुद्रा (Currency) का अविष्कार हुआ उसी दिन से गरीबी का भी उदय हुआ । मुद्रा के जरिये मुठ्ठी भर लोगो के पास मुद्रा का भंण्डारण हो जाता है दूसरा इन्सान चाहे रात दिन मेहनत करे लेकिन उसकी रोजी रोटी ही नही चल पाती । गरीबी भारत में अंग्रेजो दवारा और बाहरी आक्रांताओ ने की है और अब हमारे देश में, आजादी के बाद अंग्रेज सोच रखने वालो ने गरीबी हटाने के वजाय और मजबूत किया है । भारत में मुठ्ठी भर लोगो ने मुद्रा का भंण्डारण करके भारतीय मुद्रा को ब्लेक मनी के रुप में दूसरे देशो में जमा करवा दी है । सवाल बहुत है लेकिन इस मामले में समाधान नही है । आजादी के बाद देश में अंग्रेजो का कुचक्र चला जिससे अमीर और अमीर हुए और गरीब और गरीब हुए है । आजादी के बाद नागरिको में जागरुकता का न होना इसके अलावा अच्छे और बुरे को न समझ पाना इसीलिये बार बार एक ही पार्टी की सरकार का सत्ता में बने रहना । ये गरीबी का प्रमुख कारण था । अब सवाल है कि गरीबी को समाप्त कैसे किया जाये ?  

घर और देश को साफ सुधरा रखे ।

घर को साफ सुथरा रखने का कर्तव्य परिवार में सभी का है । घर में सभी साफ-सफाई करते है । लेकिन हम सभी अपने घर को साफ करते और कचरा, बाल, पेपर इधर-उधर देख कर गली में फेकते है मैने दिल्ली में बहुत देखा है ऐसे लोगो को इससे सिद्द होता है कि हम गली मुहल्ला और रोडो को हम अपना देश मानते ही नहीं अगर हम अपने घर में साफ सफाई रख सकते है तो अपने देश को साफ क्यों नहीं रख सकते है ? हम भारतीय साफ सफाई के प्रति इतने उदासीन क्यों ? हम दूसरो की दुहाई देने लग जाते है । दोस्तो दूसरो को मत देखो आप शुरुआत तो करो और अपने कर्तव्य को निभाओ । अच्छे लोगो को देखो और खुद अच्छे बनो । हम लोगो में वो जज्बा है अगर एक बार हम सबने ठान ली तो हम अमेरिका, जापान जैसे देशो को सफाई के मामले मे पीछे छोड़ देगे ।