जिन माता-पिता ने जन्म दिया, बच्चो का पालन पोषण किया, पढ़ाया लिखाया और एक अच्छा इन्सान बनाया । क्या उनका सम्मान नहीं करना चाहिये ? माँ खुद गीले में सोती है और बच्चे को सूखे में सुलाती है । क्या बच्चो को वॄद्दा अवस्था में माता-पिता की देख-रेख नहीं करनी चाहिये ? लेकिन आज के स्वार्थी बच्चे देख-रेख करने की बात तो दूर उल्टा माता-पिता को काम वाला बना देते है । एसा नही है कि सब बच्चे एक जैसे हो, कई बच्चे बड़े संस्कारी और आज्ञाकारी होते है अपने माता-पिता की बहुत इज्जत करते है और हर समय देख-रेख भी रखते है । जैसा करोगे वैसा भरोगे । कहा जाता है कि पिता अपने सब बच्चो को अकेला ही पालन पोषण करता है लेकिन जब पिता की बारी आती है तो माता-पिता को सब मिलकर पालते है इसके अलावा माता को पिता से अलग कर दिया जाता है कि छः माह बड़े बेटे के पास पिताजी रहेगे और छः माह छोटे बेटे के पास माताजी रहेगी इस प्रकार ये वो ओलाद है जिनके लिये कभी ये ही माता-पिता जान छिड़कते थे आज उन्हीं को देखो इन्होने कभी अपने बच्चो को अपने से अलग नहीं किया कभी चाचा या ताऊ के पास नहीं भेजा । इसीलिये सभी को अपने वृद्दा अवस्था के लिये बचत करे और योग करे ताकि अन्तिम समय तक किसी पर आश्रित न हो ।
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