आजादी के बाद देश युवा था और आज भी विश्व में भारत युवा देश है लेकिन यह भी सही है कि देश का नौजवान बेरोजगार भी है । मेरे मन में सवाल उठता है कि इतना बड़ा देश और प्राकृतिक संसाधनो से सम्पन्न फिर भी युवाओ को काम नहीं । मैं भी युवा था सन १९८३-८५ तक बेरोजगारी और आरक्षण की मार झेल रहा था । उस समय भी बेरोजगारी अपनी चर्म पर थी और हमारी गरीबी भी अति नीचे पायेदान पर थी मैने कितने धक्के खाये उसके बाद बड़ी मुश्किल से आर्मी जोइन की । युवाओ की पढ़ाई का खर्च और घर के आर्थिक हालत इन सबसे झूजना पड़ता है । बेरोजगारी १९८० के दशक में भी ऐसे ही हालात थे जैसे आज है कोई फर्क नहीं है । इस बेरोजगारी के कारण क्या है ? क्या हमारी अबादी की वजह से है ? क्या हमारी राजनीति इच्छा शक्ति की कमी है ? आजादी से आज तक आखिर बेरोजगारी के लिये कौन जबावदेह है ? क्या भ्रष्टाचार या घोटाले इसके लिये जिम्मेदार है ? इसका उत्तर सिर्फ और सिर्फ हमारा इतिहास दे सकता है । इतिहास में सब दर्ज है किसने कितने तीर मारे है ?
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