शोषण वही होगा जहाँ अपने अधिकारो के प्रति जागरुकता नहीं होगी । गरीबी का भी शोषण होता है । मजबूरी का भी शोषण होता है इन्सान-इन्सान का शोषण करता है । एक अमीर, गरीब का शोषण करता है । आखिर में ये शोषण ही भ्रष्टाचार का रुप ले लेता है । ये सरकारी मुलाजिम, नेता या कोई संस्था कितना ही दवा कर ले कि भ्रष्टाचार कम हुआ । लेकिन विगत दिनो में भ्रष्टाचार ज्यादा हुआ है कम नहीं हुआ । अगर एक साधारण या मजदूर नागरिक कहे कि भ्रष्टाचार कम हुआ तो इसे माना जा सकता है क्योकि एसे नागरिक इस समाज में या सरकारी तंत्र में जीते या रहते है ये लोग आये दिन भ्रष्टाचार के शिकार होते है और जमीनी सच्चाई से जुड़े होते है । आपने कई नेताओ को कहते सुना होगा या टी.वी पर देखा हो कि “देश जानना चाहता है” या “देश की जनता जनना चाहती है” । नेताजी देश सब जानता आप देश की जनता को बीच में मत घसीटो ।
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