Saturday, 7 November 2015

शिक्षा प्रणाली

हमारी शिक्षा प्रणाली अंग्रेजो से प्रेरित है । शिक्षा भेदभाव पूर्ण है । आज भारत में शिक्षा व्यवसायिक बन चुकी है । जिसके कारण अमीरो के लिये अलग शिक्षा और गरीबो के लिये भी अलग शिक्षा के मान दण्ड है । फिर भी भारत में शिक्षा का स्तर बहुत घटिया है भारत के कई प्रदेशो में लड़का प्रथम श्रेणी से पास होगा लेकिन ठीक से लिख पढ़ भी नहीं सकता । ये मैने बहुत सारे बच्चे ऐसे देखे है और शिक्षा का इतना खराब स्तर फिर भी महँगी शिक्षा है । सरकारी और प्राईवेट शिक्षा अपनी मन माने ढग से फीस वसूलते है और इनके पास शिक्षक भी अनुभवहीन होते है ये ही हाल सरकारी स्कूलो का भी है । टयूशन के लिये भी कई गुना फीस ऐठते है लेकिन स्कूल या कोलेज में बच्चो पर ध्यान नहीं देते । १५ अगस्त १९४७ के बाद सरकार ने भी शिक्षा के क्षेत्र में कोई ध्यान नही दिया । ये देश का बड़ा दुरुभाग्य है । आज की शिक्षा से एक अच्छा लिपिक तक नही बन सकता और न इससे कोई रोजगार मिल सकता है । वर्तमान सरकार को शिक्षा में सुधार करने चाहिये । आचार्य कुलम भी भारतीय शिक्षा के लिये एक अति उत्तम विकल्प है । ये बाबा रामदेव की एक परम्परागत पहल है । इस पर भी सरकार को विचार करना चाहिये ।

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