दुःखी मनुष्य का अर्थ है भावुक हो जाना और दुःख में शरीर की ऊर्जा का क्षय होता है । इसमें आँखो में आसू आना और चेहरा मुरझा जाता है । ये लक्षण है ऐसी दशा में भी नेगेटिव सोच होती है जबकि गुस्से में मनुष्य नेगेटिव ऊर्जा का उत्सर्जन होता है । ऐसे हालात में मनुष्य थक और कमजोर पड़ जाता है दुःख व गुस्सा में मनुष्य के शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़्ता है । इससे शरीर के आन्तरिक अंगो दवारा जहरीले रासायनिक पदार्थो का स्राव होता है जिससे कब्ज, गैस, ह्रदय रोग या दिमाकी रोग होने सम्भावना बड़ जाती है । इसलिये दुःख को स्थाई न होने दे । ज्यादा समय के लिये दुःख अति दुःखदायी हो जाता है ।
खुशी में मनुष्य के शरीर में ऊर्जा का संचार हो जाता है और ऐसे माहोल में शरीर ऊर्जावान हो जाता है । पूरा शरीर अच्छी तरह से काम करता है इसलिये प्रत्येक मनुष्य को खुश और प्रसन्न रहने की कोशिश करनी चाहिये ।
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