शब्द, स्पर्श, रुप, रस और गंध – ये पाँच विषय शरीर का आराम, मान और नामकी बड़ाई – इनके दावारा सुख लेने का नाम ‘भोग’ है । भोगो के लिये पदार्थ, रुपये-पैसे, मकान आदि का जो संग्रह किया जाता है, उसका नाम ‘ऐश्वर्य’ है । इन भोग और ऐश्वर्य में जिनकी आसक्ति है, प्रियता है, खिंचाव है अर्थात इनमें जिनकी महत्वबुद्दि है, उनको ‘भोगैस्वर्यप्रसक्तानाम’ कहा गया है । जो भोग और ऐश्वर्य में ही लगे रहते है, वे आसुरी सम्पत्तिवाले होते है । कारण कि ‘असु’ नाम प्राणों का है और उन प्राणो का है और उन प्राणों को जो बनाये रखना चाहते है, उन प्राणपोषण परायण लोगों का नाम ‘असुर’ है ।
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