Tuesday, 17 November 2015

थोता चना बजे घना

अज्ञानी और मूर्ख लोग गाल ज्यादा बजाते है । आखिर ये लोग क्यो चिल्लाते है ? जैसे ढोलक या खाली पीपा पर थोड़ा डंडा मारो ज्यादा शोर करेगा । लेकिन गेहूँ से भरा पीपा पर डंडा मारने से शोर या आवाज नहीं होगी अगर ज्यादा मारोगे तो डंडा ही टूट जायेगा । क्योकि इसमें वजन है । इसी तरह अज्ञानी और मूर्ख लोग बक-बक बहुत करते है क्योकि अन्दर कुछ है ही नहीं ये खाली पीपा या कनस्त होते है । ज्ञानी और समझदार लोग, शान्त स्वभाव, अपने कर्म और कर्तव्यों पर ध्यान देते है । बजाय शोर और चिल्लाने के । इनके सामने मूर्ख व्यक्ति कभी टिक ही नही सकता । चिल्लाते-चिल्लाते खुद ही टूट जाता है क्योकि ज्ञान का प्रभाव इतना होता है कि मूर्ख को टूटना ही पड़ता है । प्रभाव इतना विलक्षण होता है कि मूर्ख, दुष्ट, गददार, राष्ट्रविरोधी एक हजार हो इनके लिये ज्ञानी पुरुष या देशभक्त एक ही काफी है ।

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