देश में दुधारु पशुओ की संख्या दिनो दिन घटी है आज गाँवो में लोग पशु कम पालते है किसान खेती ट्रेक्टर से करवाता है और खाद यूरिया की डालता है । पशुधन गाँवो में लोग कम पालते है । लेकिन आज बाजार में मावा (खोया) की कोई कमी नहीं है । पनीर की कोई कमी नहीं और दूध व दही की भी कोई कमी नहीं । इसके साथ ही असली और नकली की भी कोई पहिचान नहीं । आज भी कई जगह मिलावटी मवा टनो मे पकड़ा गया है । फिर भी नकली खोया की मिठाईयाँ बाजार में सरे आम बिक रही है । इस देश में कुछ लोग सहिष्णुता की बात करते है ये वे ही लोग है जो एक आंतकवादी के लिये रात में दो बजे देश का सबसे बड़ा और आदरणीय उच्च न्यायलय को खुलवा देते है । और वे लोग जो अपने तक्मे और पुरुस्कार वापस करने वाले । अब आओ सामने और इन मिलावटखोरो के लिये कुछ करो ये बिगाड़ रहे है बच्चो की सेहत, देश से खिलवाड़ कर रहे है । खैर ये क्या करेगे हमारे लिये । हमें बाजार की मिठाईयो से बचना होगा और अपने घर पर ही मिठाईयाँ बनाये जैसे जलेबी, समोसा, बेसन के लड्डू और बर्फी, गुलाब जामुन इत्यादि बना सकते हो । विदेशी कम्पनियों या लोकल हलवाहियो पर विश्वास मत करो । तुलसीदा ने ठीक कहा है “पराधीन सपनेहु सुख नाही” इसलिये दोस्तो हम अपने बच्चो व परिवार को इस जहर से बचाये और आप सभी को सुरक्षित दिपावली की बहुत बहुत शुभकामनाये
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