एक अहम के त्यागने से अनन्त
सृष्टि का त्याग हो जाता है । क्योकि अहम ने ही सम्पूर्ण जगत को धारण कर रखा है
जैसे कितनी घास क्यों न हो, क्या अग्नि के सामने टिक सकती है ? कितना ही अँधेरा हो,
क्या प्रकाश के सामने टिक सकता है ?
अँधेरे और प्रकाश में लड़ाई हो जाये तो
क्या अँधेरा जीत जायेगा ? ऐसे ही आज्ञान और ज्ञान की लड़ाई हो जाये तो क्या अज्ञान
जीत जायेगा ? महान से महान भय क्या अभय के सामने टिक सकता है ? समता थोड़ी हो तो
भी पूरी है और भय महान हो तो भी अधूरा है ।
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