Thursday, 26 November 2015

चले थे मजाक उड़ाने, खुद मजाक बन गये ।


चले थे मोदी जी का मजाक उड़ाने

खुद मजाक बन गये ।

एक कहावत है कि “विनाश काले विपरीत बुद्दि” और राहुल गाँधी जी ने अपनी सोच छात्रो पर थोपनी चाही लेकिन छात्र जमीनी सच्चाई से वाकिफ थे और ये अपना पूरा होम वर्क करते है और पूरी तरह से जागरुक है। ये बिहार नहीं है इसे Karnataka  (Bengaluru) कहते है ।

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