सुख आता हुआ अच्छा लगता है और जाता हुआ बुरा लगता है । तथा दुःख आता हुआ बुरा लगता है और जाता हुआ अच्छा लगता है । अतः इसमें कौन अच्छा है कौन बुरा ? अर्थात दोनो ही समान है बराबर है इस प्रकार सुख दुःख में समबुद्दी रखते हुऐ तुझे अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए । तेरी किसी कर्म में सुख के लोभ से प्रवृत्ति नहो और दुःख के भय से निवृत्ति न हो । कर्मो में तेरी प्रवृत्ति शास्त्र के अनुसार हो ।
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