अकेलापन
जब अकेलापन शताये तो सूर्य
को, वृक्षो को, पहाड़ो को, भगवान को, और कलम को अपना साथी या मित्र चुनो । इनसे
बात करो किसी हद तक आपका अकेलापन दूर होगा । आखिर अकेलापन क्यो होता है ? अकेलापन
उस समय ज्यादा अखरता है जब अपने दूर हो जाते है । लेकिन आज के युग में मनुष्य अपने
अन्तिम समय में अपने आपको अकेला ही पाता है क्योकि किसी के पास समय नहीं है ।
लेकिन मैं अकेलेपन को शान्ति का दूसरा रुप मानता हूँ ये समय है चाहे वो अन्तिम समय
क्यो न हो ? हम सांसारिक लफड़ो से दूर भगवान के समीप पहुँच सकते है आधयात्मिक
ज्ञान की तरफ बड़ सकते है । नही तो हमें पछतावा जरुर होगा और कहा जयेगा कि बचपन
खेलकर खोया, जवानी नीदभर सोया और बुड़ापा देखकर रोया । अन्तिम पड़ाव में हमे महसूस
हुआ कि शुरु से हमें अकेलेपन को ही चुनना था । खैर उस समय मै इतना जागरुक न होने
की वजह से इस जिन्दगी का जीने का रहस्य समझ न सका शायद इसीलिये हमने शादी को चुना
खैर मुझे पछतावा नहीं है क्योकि और भी इस रास्ते में रहस्य और कारण थे । लेकिन
हमने या किसी ने जो चुना है उससे भागना नहीं चाहिये । अकेलापन सबका दूर होगा चाहे
वो किसी भी कारण से हो, कोशिश करो किसी ने कहा है कि “कोशिशे हमेशा कामयाब होती और
वादे अक्सर टूट जाते है”
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