Wednesday, 28 October 2015

सुरक्षित दिपावली मनाये

दिपावली प्रकाश का पर्व है । दीपावली कार्तिक माह की अमावस को मनाई जाती है । रोशनी से अंधकार दूर हो जाता है इसी तरह मन में अच्छे विचारों को प्रकाशित कर हम अपने मन के अंधकार को दूर कर सकते है । कई दिनो पहले घरों व दुकानो में सफाई शुरु हो जाती है और साथ ही सर्दी के मौसम की भी शुरुआत हो जाती है । दिपावली पर घरो में खुशी का माहोल रहता है बच्चे बहुत खुश रहते है । दिपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का त्योहार आता है । इस दिन बरतन या सोना खरीदते है लोग और इस दिन तुलसी या घर के दवार पर दीपक जलाया जाता है । इससे अगले दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीवाली होती है । इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाये जाते है । दिपावली के दिन भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता १४ वर्ष का वनबास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे । और भगवान के आने की खुशी में नगरवासियो ने घर में घी के दिये जलाये थे । तभी से दिपावली की शुरुआत हुई । लक्ष्मी पूजा के दूसरे दिन “गोवर्धन पूजा” मनाया जाता है इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इन्द्र को पराजित किया था । दिपावली पर दिये खूब जलाये और पटाखा बिलकुल न फूड़े और अपने पर्यावरण को प्रदूषण रहित रखे और बच्चे मिठाई खाये, दिये जलाये और नये कपड़े पहरे लेकिन बच्चो पटाखे नहीं चलाये सभी बच्चे अपने आपको सुरक्षित रखे क्योकि आप लोग देश के भविष्य हो । पटाखे नहीं चलाना । क्योकि पटाखे से जल सकते हो, धुआँ से नुकसान होता है और आवाज से कान के परदे को नुकसान हो सकता है । इसलिये पटाखे किसी भी किमत पर नहीं चलाना । सुरक्षित दिपावली मनाओ और बच्चो को भी सुरक्षित रखे ।

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