इस संसार में जो पैदा हुआ है वो मरेगा जरुर यह परम सत्य है । मनुष्य का शरीर पल पल परिवर्तनशील है माँ के गर्भ से लेकर बाल्यकाल, जवानी, बुड़ापा और अंत में मृत्यु को प्राप्त होता है । यहाँ परिवर्तनशील से मतलब है कि मनुष्य का पल पल मरना । जन्म हुआ मरा और बचपन से जवानी फिर मरा और जवानी से बुड़ापा फिर मरा और अन्त में मृत्यु को प्राप्त होता है । और इस तरह आत्मा दूसरे शरीर को ग्रहण करती है । जैसे हमारा शरीर हर रोज कपड़े बदली करता है ठीक वैसे ही आत्मा वो ही होती है सिर्फ शरीर बदली होता है । दोस्तो ये है गीता का ज्ञान । इसीलिये कहा गया है कि "पूत कपूत तो का धन संचय, पूत सपूत तो का धन संचय" इसका मतलब है अगर पुत्र दुष्ट है तो धन जमा करने की आवश्यकता नहीं और अगर पुत्र सुपुत्र है तो भी धन एकत्र करने की जरुरत नही है । सभी को पता है कोन लोग तीन-तीन पीढीयों के लिये धन संचय करते है ।
No comments:
Post a Comment