Sunday, 4 October 2015

छोटा और बड़ा


जो मनुष्य छोटा होता है और वही उँचे स्थान पर नियुक्त होने से बड़ा माना जाता है । और उँचे स्थान के कारण अपने को बड़ा मानता है । वह वास्तव में बहुत छोटा होता है । और जो खुद बड़ा होता है वह जहाँ भी रहता है उसके कारण वह स्थान भी बड़ा हो जाता है । ये हमारे यहाँ लगभग सभी विभागो में ऐसे छोटे व्यक्ति जो पद पाकर अपने आपको बड़ा समझने लगते है उनकी सोच बहुत संकीर्ण सोच होती है । इन सबो की वजह से आज भ्रष्टाचार, बेइमानी, पक्ष-पात, गन्दगी और पद का बुरी तरह से दुरुउपयोग  हर क्षेत्र में व्याप्त है । ऐसे व्यक्ति राजनित में, प्रशासन में, सेना में, न्यायपालिका मे यानी हर विभाग में मिल जायेगे । मै इसका खुद भुक्तभोगी हूँ । लेकिन जो खुद बड़ा होता है और जो जहाँ रहता है उस जगह को बड़ा बना देता है ऐसे लोग बहुत कम है वे छोटे लोग इन को कही न कही फँसा कर अपने रास्ते से हटा देते है ।




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