पंक्षी भी प्रकृति का ऐक अभिन्न अंग है । वातावरण दूषित होने के कारण पक्षियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिये विकास के नाम पर प्रकृति का बुरी तरह से दोहन किया है । वनो को काट-काट कर इमारते खड़ी कर दी और खेती की जमीन पर भी होटेल बना दिये गये । नदी, तालाब और कुआँ सबके सब दुषित कर दिये जहाँ पक्षियों का निवास होता है आखिर ये बेजुबान जाये तो कहाँ जाये । हम सबको पक्षियों के बारे में सोचना होगा । मै सभी से अपील करता हूँ कि सभी को पक्षियों के लिये दाना डालना चाहिये दाना छत या खुले में डाले और ऐसे ही पानी भी रखे ३५-४० रु. का पानी का बर्तन आता है । आप और हम इन पर कोई अहसान नही कर रहे ये इनका हक है । ऐसा भाव होना चाहिये आपका और सभी का भला होगा और भला का उल्टा करे तो लाभ होगा ।
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