Monday, 5 October 2015


हमारे ग्रन्थो में कहा गया है कि मंत्री, गुरु और वैध (डोक्टर) ये तीनो यदि डर कर प्रिय बात  करे  या  राजा  को सही राय दे। सिर्फ जी हजूरी करे और इनमें सच बोलने की हिम्मत ना हो।  चाहे  राजा गलत करे, मनमानी करे और सब कुछ जानते हुये भी प्रजा का सच राजा के सम्मुख पेश करे तो इनके द्दारा उस राज्य, धर्म  और  प्रजा का शीघ्र  ही विनाश हो जाता है कहने  का  तातपर्य  है कि  हमे  अपने  विधायको और सांसदो को सोच समझ के चुनना चाहिए ताकि ये सब आगे चलकर देशहित में  न्याय पूर्ण फैसले करे और उचित कानूनो का निर्माण करे

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