Thursday, 8 October 2015

डायन मंहगाई से लड़ना होगा


प्याज की पैदावार हमारे देश में लगभग सभी राज्यो में होती है । और इतनी पैदावार होती है कि ६० से ८० रुपये किलो प्याज न बिके । प्याज का मंहगा होना शायद जमाखोरी की वजह से है । आज सब्जिया आसमान छू रही है क्योकि थोक सब्जी मंडी से लोगो तक पहुँचने में ५ से ८ गुना सब्जियो के रेट बड़ जाते है । और प्याज हमारे देश मे हर सब्जी के साथ यूज किया जाता है इसलिये पूरी साल इसकी डिमांड बनी रहती है । ये ग्रीन मसाला और सब्जी भी है और आयुर्वेद में दवा के रुप में भी इसका प्रयोग किया जाता है लोहा इसमे प्रचुर मात्रा मे होता है । जपान में जब कोई वस्तु के दाम अचानक बड़ जाते है । तो वहाँ के लोग उसको खरीदना बंद कर देते है । और जब तक उसके रेट ठीक-ठाक नहीं हो जाते वो नहीं लेते । हमें भी एसे ही करना चाहिए और प्याज की जगह लहसुन का प्रयोग करे दोनो ग्रीन मसाले है और बहुत से गुण एक जैसे है । ये प्रयास जनता को जरुर करना चाहिए और ये जबाव होगा जमाखोरो के लिये । ये मत सोचो ये और वो नही कर रहा आप शुरु तो किजीए आपको इसका परिणाम जरुर मिलेगा । दूसरा तरीका हमे अपनी किचन गार्डन जरुर विकसित करे जिसमें यूरिया खादे इस्तेमाल न करे गोबर की खाद का इस्तेमाल करे और सब्जिया और प्याज लगाये । शहर वाले अगर जमीन है तो ठीक है अन्यथा गमलो में सब्जिया उगाये । इसी तरह अरहर की दाल मंहगी है इसका कारण देश में दालो की पैदावार ना के बराबर है । वैसे जल्दी ही प्याज और दाल के रेट कम होगे क्योकि सरकार ने प्याज और अरहर की दाल आयत की है दोनो भारत पहुँच चुके है एक हफ्ते के अन्दर बाजार मे आ जयेगे । इस तरह से हम सब डायन मंहगाई से दो-दो हाथ कर सकते है ।

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