Saturday, 31 October 2015

किसान की वर्तमान हालात का जिम्मेवार कौन ?

किसान भारत देश का अन्नदाता है । लेकिन अन्नदाता के ही आर्थिक हालात इतने खराब है कि किसान आत्म हत्या की सोचता है या करता है । किसान इतना मजबूर क्यों ? क्योकि कभी सूखा, तो कभी बाढ़ और कभी पाला ये प्राकृतिक आपदाये से जूझता किसान और अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो उसको जूझना पड़ता है अपने व्यपारियो, मुनीमों और कमीशन खोरो से । किसान के अनाज और सब्जिया, ये लोग ओने-पोने भाव में खरीद कर और खुदरा बाजार में आठ से दस गुना बड़ा कर बेचते है । एक सब्जी वाला सब्जी मंडी से ३ या ५ रुपये किलो लोकी खरीदता है और खुदरा बजार में उसी लोकी को ४० से ५० रुपये किलो में बेचता है । अब आप खुद सोचो कि किसान से मुनीम या व्यपारी किस रेट मे खरीदता होगा । किसान को क्या मिला ? इसी तरह आलू के चिप्स बनाने वाली विदेशी कम्पनिया किसानो से आलू ३ से ५ रुपये किलो लेती और चिप्स बनाकर उसी आलू को लगभग ५०० से ७०० किलो के हिसाब से बेचती है । इस देश की कितनी बड़ी विडम्बना है कि विदेशी कम्पनी यहाँ आकर चिप्स, आचार, आटा, दाल और नमकीन जैसी छोटी- छोटी चीजे बनाकर देश को लूटा जा रहा है क्या ये खाने पीने की चीजे हमारे किसान नही बना सकते ? ये आजादी से लेकर अब तक किसान का शोषण हुआ है । आज का किसान कृषि की आधुनिक मशीने प्रयोग करता है और आधुनिक खाद इस्तेमाल करता है आधुनिक बीज प्रयोग करता है लेकिन किसान को आधुनिक कमाई से दूर रखा गया । किसान को ऐसी आधुनिकतम तकनीकी के पास लाया गया जिससे उसकी लागत बड़े लेकिन किसान इसकी भरपायी कैसे करे यानी कमाने (लघु उदयोग) के तरीको से दूर रखा गया । नतीजा ये हुआ कि किसान देवालिया हो गया और उसके सामने आत्महत्या के आलावा और कोई रास्ता नही । अब सवाल आपके मन मे भी उठा होगा । किसान के आज के हालात का जिम्मेवार कौन ? आपशन है १. क्या हमारे देश की गलत नीतिया ? २. क्या तत्कालीन सरकारे ? ३. क्या किसान खुद इसका जिम्मेवार है ? ४. क्या आजादी के बाद भी अंग्रेजो वाली नीतिया जिम्मेवार है ? आखिर इसका जिम्मेवार है कौन ? और मै इतना अवश्य कहूँगा कि ये आवाज इन तथाकथित तक्में और पुरुस्कार लोटाने वालो ने क्यो नहीं उठायी ?

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