Sunday, 18 October 2015

रामायण रोज पढ़े


तुलसी दास ने रामायण महिमा में धर्म, समाज में फैली बुराइयो, कुरीतियो, आपस में प्रेम और भाईचारे, सदभावना और देश की सेवा के लिये समाज को प्रेरित किया है । 

हमें निज धर्म की शिक्षा सिखाती नित्य रामायण ।
कपट छल छन्द से बचना बताती हमको रामायण ॥
कपट संसार सागर से जो होना पार तुम चाहो ।
त्याग कर मोह और माया पढ़ो तुम नित्य रामायण ॥
ह्रदय मन्दिर के भीतर जिनके है कुछ ज्ञान औ भक्ति ।
उन्हें सदमार्ग की शिक्षा सिखाती नित्य रामायण ॥
पिता माता व भ्राता में बढ़े नित प्रेम की धारा ।
यही है सार दुनियाँ में बताती जो कि रामायण ॥
दीन दुखियों की सेवा में लगाना अपने धन मन का ।
करना निज देश की सेवा बताती हमको रमायण ।।
बनाकर दास तुलसी ने किया उपकार दुनियाँ का ।
ह्रदय में प्रेम की धारा बहाती नित्य रामायण ॥
करें विनती यह गोवर्दृन पढ़ो नित प्रेम से इसको ।
प्रेम भक्ति का सागर है, अनूठा ग्रन्थ रामायण ॥

1 comment:

  1. Pranam aapko, aap pehele hain jinhone yye Ramayana post kia hai

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