तुलसी दास ने रामायण महिमा में धर्म, समाज में फैली बुराइयो, कुरीतियो, आपस में प्रेम और भाईचारे, सदभावना और देश की सेवा के लिये समाज को प्रेरित किया है ।
हमें निज धर्म की शिक्षा सिखाती नित्य रामायण ।
कपट छल छन्द से बचना बताती हमको रामायण ॥
कपट संसार सागर से जो होना पार तुम चाहो ।
त्याग कर मोह और माया पढ़ो तुम नित्य रामायण ॥
ह्रदय मन्दिर के भीतर जिनके है कुछ ज्ञान औ भक्ति ।
उन्हें सदमार्ग की शिक्षा सिखाती नित्य रामायण ॥
पिता माता व भ्राता में बढ़े नित प्रेम की धारा ।
यही है सार दुनियाँ में बताती जो कि रामायण ॥
दीन दुखियों की सेवा में लगाना अपने धन मन का ।
करना निज देश की सेवा बताती हमको रमायण ।।
बनाकर दास तुलसी ने किया उपकार दुनियाँ का ।
ह्रदय में प्रेम की धारा बहाती नित्य रामायण ॥
करें विनती यह गोवर्दृन पढ़ो नित प्रेम से इसको ।
प्रेम भक्ति का सागर है, अनूठा ग्रन्थ रामायण ॥
Pranam aapko, aap pehele hain jinhone yye Ramayana post kia hai
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