Thursday, 29 October 2015

दहेज

दहेज हमारे देश की एक समाजिक समस्या है और ये सदियो पुरानी समस्या है इसमें बेटी की शादी पर बेटी वालो को वर (दुल्हा) पक्ष को दहेज रुप मे धन-दौलत और गाड़ी इत्यादि देना पड़ता है । आज भारत में मध्यम वर्ग सब कुछ जानते हुए भी कु्छ नहीं जानता । सबको पता है कि दहेज लेना कानून अपराध है लेकिन इस देश में सब कुछ चलता है और चल भी रहा है । दहेज पर सबसे पहले कानून बना Dowry Prohibition Act 1961 और इसके बाद जब घरेलू हिन्सा बेटियो और बहनो पर बड़ी तो कानून बना Protection of Women from Domestic Violence Act 2005 इन सब कानूनो के बावजूद न तो दहेज कम हुआ और ना ही औरतो के खिलाफ घरेलू हिन्सा में कमी आयी और ना ही सामाजिक हिन्सा मे कमी आयी । इसका उल्टा हुआ दहेज से बेटियों और बहनो के साथ दुरव्यवहार बड़ा और जलाकर मार देने की प्रथा बड़ी है इसी तरह बेटियो और बहनो का बाहर निकलना इस समाज के दुष्ट लोगो ने दूभर कर दिया । बहन-बेटी अगर बाहर जाये तो घर वालो को ठीक से नीद नही आती । अब बताओ आज एक पिता कैसे बहन बेटी को बचा सकता है । ये एक सामाजिक समस्या है इसमे हम सब बराबर के हिस्सेदार और जबावदार है । आज समाज को चाहिए कि अपने बेटो को अच्छे संस्कार दे । क्योकि ये सर्व विदित है कि जो दहेज माँगता है वो किसी न किसी का बेटा (लड़का) और जो बाहर जा कर किसी लड़की को छेड़ता है या बलात्कार करता है तो वो भी किसी न किसी का बेटा ही होता है । उसे बचाओ मत नही तो इस तरह की समस्याये और बड़ेगी । प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि बेटो से भी पूछा करो कि तुम अब तक कहाँ थे ? भारतीय समाज को ये अपनी संकीर्ण सोच बदलनी होगी और निकलना होगा इस पुत्र मोह से । हर भारतीय को अपनी सोच बदलनी होगी तभी हम बहन और बेटियो को इन समस्याओ से बचा सकते है । सरकार को चाहिये कि दहेज लेने वाले, जलाकर मारने वालो और बलात्कारियो के खिलाफ फाँसी लागू करे । आज तो बलात्कारी और दहेज से मारने वाले खुलेआम घूम रहे है इनको फाँसी होनी चाहिए ।

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