Friday, 9 October 2015

किसान और आत्महत्या

मेरे मन में सवाल उठता है कि हमारे देश का किसान क्यो आत्महत्या करता है ? शायद आपके मन में भी ऐसा सवाल आया होगा । किसान को खेती करना बहुत मंहगा हो गया है । यूरिया खाद और कीटनाशको के दाम आसमान छू रहे है इसी क्रम में खेती में लागत बहुत बड़ गयी है । इन केमिकल खादो और कीटनाशको की वजह से अनाजो और सब्जियो के द्दारा ये जहर हमारे शरीर में जाता है इस जहर की वजह से किसानो और लोगो में भाति-भाति की बीमारियो से ग्रसित हो रहे है । आज से ४०-५० वर्ष पहले गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जाता था और गोबर की खाद की वजह से फसल में कोई बीमारी नहीं होती थी और नाही किसी प्रकार का कीटनाशको का इस्तेमाल किया जाता था । किसान और लोग पहलवान हुआ करते थे उस जमाने में हर गाँव में अखाडे हुआ करते थे । आज क्या है ? जबाव है दारु शराब खाने । आज किसान भ्रमित हो गया है यूरिया खाद और कीटनाशको और इन अस्पतालो के कुचक्र झेल रहा है । इसके बाद अगर प्राकृतिक आपदा (बाढ़,ओले,सूखा इत्यादि) आ जाये तो किसान बरबाद हो जाता है । अब किसान को चाहिये कि यूरिया और कीटनाशक मुक्त खेती करे । कृषि के साथ-साथ पशु पालन और साथ में गाय भी पाले । दुध, घी और खोया से पैसे भी कमाये और घर मे भी इस्तेमाल करे । गोबर की खाद खेतो में डाल कर खेती में लागत कम करे और विष मुक्त खेती करे । इससे हमारा किसान कभी भी आत्महत्या की नहीं सोचेगा अगर सोचेगा तो सिर्फ और सिर्फ जीने के लिये । देशी तकनीक से कीटनाशक बनाने की विधि जो कि दुर्गा अनुसंधान केन्द्र, जयपुर ने विकसित की है अगर आपको पता है फिर भी जल्द ही पूरा विवरण दूँगा सबसे बड़ी बात है कि मैने इसको खुद इस्तेमाल किया है बहुत अच्छे परिणाम मिले । सिर्फ मेहनत आपकी होगी गाँव में बनाने से कोई खर्च नही है ।

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