जो आदि और अन्त में नहीं है, उसका ‘नहीं’ पना नित्य-निरन्तर है तथा जो आदि और अन्त में है ।, उसका ‘है’ पना नित्य-निरन्तर है । जिसका ‘नहीं’ – पना नित्य-निरन्तर है । वह ‘असत’ (शरीर) है और जिसका ‘है’ पना नित्य-निरन्तर है, वह ‘सत’ (शरीरी) है । असत के साथ हमारा नित्य वियोग है और सत के साथ हमारा नित्ययोग है ।
No comments:
Post a Comment